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समीक्षा: दर्शकों से कनेक्ट नहीं कर पाई ‘हसीना पारकर’ (ढाई स्टार)

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भेड़ चाल से चलती हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में जब एक फ़िल्म सफल होती है तो उसी तरह की फ़िल्में जबतक पूरी तरह से पीट ना जाए लगातार बनती रहती हैं! पिछले कुछ समय से बॉलीवुड में बायोपिक की बाढ़ आई हुई है और अगर यह बाढ़ नहीं थमी तो हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री का नाम ‘बायोपिक बॉलीवुड’ रखने में कोई परहेज नहीं किया जाए। इसी भेड़चाल को कायम रखते हुए निर्देशक अपूर्व लखिया की फ़िल्म ‘हसीना पारकर’ बॉक्स ऑफिस पर आज दस्तक दे रही है।

हसीना पारकर कुख्यात डॉन दाऊद इब्राहिम की बहन हैं। वह मुंबई के गोवंडी इलाके में अपना दरबार लगाती रहीं। जब गैंगवार अपने चरम पर था तो वह लोगों के झगड़े सुलझाती रहीं, कंस्ट्रक्शन बिजनेस में लगी रहीं और बिल्डरों को प्रोटेक्शन देती रहीं। कामल कि बात यह भी कि लगभग 20 साल के कार्यकाल में उन पर सिर्फ एक मुकदमा चला और उसमें भी वह बरी हो गईं!

हसीना पारकर की ज़िंदगी में जो-जो उतार-चढ़ाव आए वह उनके भाई दाऊद इब्राहिम के अपराधिक ग्राफ के लगातार बढ़ने से आए। जैसे-जैसे दाऊद बड़ा डॉन होता गया, वैसे-वैसे हसीना की निजी ज़िंदगी में किस तरह की परेशानियां आती रहीं इसी को बड़े पर्दे पर रचा है निर्देशक अपूर्व लखिया ने अपनी फ़िल्म ‘हसीना पारकर’ में। ‘हसीना पारकर’ फ़िल्म में आप सिर्फ उत्सुकता के कारण जा सकते हैं। एक दर्शक के तौर पर आप इस किरदार से जुड़ाव महसूस नहीं करते, आप सिर्फ उसकी यात्रा के गवाह होते हैं। ऐसे में जब केंद्रीय भूमिका से आपका जुड़ाव ना हो तो फिर फ़िल्म बहुत ज्यादा असर करती नज़र नहीं आती।

हालांकि, अपूर्व ने अपनी पिछली फ़िल्मों से अलग कई सारे इमोशनल सींस पर बहुत बेहतर काम किया है। लेकिन, कोर्ट ऑफ लव में निर्दोष साबित होने के बावजूद भी दर्शक के रूप में आप सभी जानते हैं की हकीकत क्या है? निश्चित तौर पर एक छोटी बहन के जीवन में जिस तरह की उथल-पुथल अपने अपराधी भाई के कारण आईं, उससे सहानभूति होनी चाहिए थी मगर असल में ऐसा नहीं हो पाता!

अगर अभिनय की बात की जाए तो श्रद्धा कपूर ने अपनी पूरी जान लगाकर इस किरदार को बनाने की कोशिश की है। मगर जो प्रभाव पहले लुक का पोस्टर आने के समय हुआ था वह पूरी फ़िल्म में नहीं हो पाया। कभी-कभी यूं लगा शायद श्रद्धा की कास्टिंग इस फ़िल्म के लिए ठीक नहीं!

श्रद्धा के भाई सिद्धांत कपूर दाऊद इब्राहिम के किरदार में एकदम सटीक नजर आए! कुल मिलाकर यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि ‘हसीना पारकर’ कोई अद्भुत फ़िल्म नहीं मगर दाऊद इब्राहिम की बहन और दाऊद के रिश्ते किस तरह से रहे, दाऊद के कारण उनके परिवार ने क्या झेला, अगर यह जानना हो तो आप यह फ़िल्म देख सकते हैं।